RBI New Rule – देशभर में दीपावली से पहले गेहूं के दामों में अचानक उछाल देखने को मिल रहा है, जिससे आम लोगों की रसोई पर सीधा असर पड़ रहा है। पिछले कुछ महीनों से सरकार द्वारा भंडार से सीमित गेहूं जारी करने और निर्यात मांग बढ़ने के कारण बाजार में सप्लाई घट गई है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों की मंडियों में इस समय गेहूं के भाव ₹2,700 से ₹3,000 प्रति क्विंटल तक पहुंच चुके हैं। यह दर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से लगभग 10 से 12 प्रतिशत अधिक है। त्योहारों के समय लोगों की खपत बढ़ने से मांग में तेजी आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, अभी के हालात को देखते हुए दीपावली तक गेहूं के दामों में कमी आने की संभावना बहुत कम है। किसानों को जहां इसका लाभ हो रहा है, वहीं उपभोक्ताओं के बजट पर इसका बोझ बढ़ता जा रहा है।

देश की प्रमुख मंडियों में तेजी के कारण
देश की प्रमुख मंडियों जैसे दिल्ली की आजादपुर, लुधियाना, इंदौर और कानपुर में पिछले कुछ दिनों से गेहूं के दामों में ₹150 से ₹200 प्रति क्विंटल की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं—सरकारी भंडार में कमी, निर्यात की बढ़ती मांग और त्योहारी सीजन में घरेलू खपत का बढ़ना। कुछ क्षेत्रों में बारिश और मौसम की अनियमितता के कारण गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिससे प्रीमियम क्वालिटी का गेहूं महंगा हो गया है। सरकार अब खुले बाजार बिक्री योजना (OMSS) के तहत अतिरिक्त गेहूं जारी करने पर विचार कर रही है ताकि बाजार में स्थिरता लाई जा सके और उपभोक्ताओं को राहत मिले।
त्योहारी सीजन में मांग का दबाव
दीपावली के आसपास बेकरी, मिठाई और खाद्य उद्योगों में गेहूं आधारित उत्पादों की मांग 20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इस समय मिलर्स और थोक व्यापारियों पर ज्यादा गेहूं खरीदने का दबाव रहता है। इसके साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक गेहूं आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे भारत से निर्यात के अवसर बढ़ गए हैं। कुछ निजी कंपनियां विदेशी बाजारों में निर्यात के लिए अधिक मात्रा में गेहूं खरीद रही हैं। इससे घरेलू बाजार में कीमतें और चढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द आपूर्ति बढ़ाने के कदम नहीं उठाए, तो दीपावली के बाद भी कीमतों में गिरावट की उम्मीद नहीं की जा सकती।
सरकारी प्रयास और उपभोक्ताओं पर असर
सरकार अब इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। खाद्य मंत्रालय गेहूं की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने बफर स्टॉक से गेहूं जारी करने की योजना बना रहा है। खुले बाजार में सरकारी हस्तक्षेप से थोक कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की जाएगी। इस बीच, आटे और अन्य गेहूं उत्पादों की खुदरा कीमतों में पहले ही 5 से 8 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। आम लोगों के लिए यह एक अतिरिक्त बोझ साबित हो रहा है, खासकर उन परिवारों के लिए जिनका बजट पहले से ही महंगाई की मार झेल रहा है।
किसानों को फायदा और आगे की संभावनाएं
हालांकि यह बढ़ोतरी किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। उन्हें अपनी उपज के बेहतर दाम मिल रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है। किसान संगठन इसे सकारात्मक संकेत मान रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि सरकार स्थायी समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाकर और भंडारण सुविधाएं सुधारकर किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। विशेषज्ञों के अनुसार, अगले कुछ महीनों में भी गेहूं के दाम ऊंचे रह सकते हैं क्योंकि फसल का नया उत्पादन आने में समय है।
