Old Pension News – पुरानी पेंशन योजना (OPS) की वापसी पर देशभर में फिर से गरम बहस शुरू हो गई है। महाराष्ट्र में इस मुद्दे ने नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है, क्योंकि राज्य सरकार पर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का दबाव बढ़ता जा रहा है। कई राज्यों ने पहले ही OPS को बहाल कर लिया है, जिससे अब महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में भी उम्मीदें और मांगें बढ़ गई हैं। कर्मचारियों का मानना है कि OPS उन्हें वित्तीय सुरक्षा और स्थिरता देता है, जबकि नई पेंशन योजना (NPS) बाजार से जुड़ी होने के कारण जोखिम भरी है। यही वजह है कि OPS की बहाली का मुद्दा चुनावी राजनीति में भी बड़ा हथियार बन गया है।

OPS वापसी पर महाराष्ट्र में बढ़ता राजनीतिक दबाव
महाराष्ट्र में OPS की बहाली को लेकर लगातार आंदोलन और रैलियां हो रही हैं। कर्मचारी संगठन और यूनियनें सड़क पर उतरकर सरकार से पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग कर रही हैं। इस बढ़ते दबाव का असर अब राजनीतिक दलों पर भी साफ दिखने लगा है। विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को चुनावी एजेंडा बनाकर सरकार को घेर रही हैं, वहीं सरकार के लिए यह फैसला आसान नहीं है क्योंकि OPS लागू करने पर राज्य के वित्तीय घाटे में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। विपक्ष यह तर्क दे रहा है कि अन्य राज्यों ने OPS लागू करके कर्मचारियों को राहत दी है तो महाराष्ट्र क्यों पीछे रहे? सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है – एक तरफ जनता और कर्मचारियों का दबाव और दूसरी तरफ वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी। आने वाले महीनों में यह मुद्दा चुनावी राजनीति में और भी गर्म हो सकता है।
अन्य राज्यों में OPS की बहाली और उसका प्रभाव
राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों ने पहले ही OPS को लागू कर दिया है। इन राज्यों में OPS बहाल होने के बाद कर्मचारियों का भरोसा सरकार पर बढ़ा है और विरोध प्रदर्शनों में भी कमी आई है। OPS की बहाली से कर्मचारियों को भविष्य में निश्चित पेंशन मिलने का भरोसा मिलता है, जिससे वे अपनी रिटायरमेंट योजना को सुरक्षित मानते हैं। हालांकि, इन राज्यों की वित्तीय स्थिति पर OPS का असर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
OPS बनाम NPS: कर्मचारियों की प्रमुख चिंताएं
OPS और NPS की तुलना करते समय कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा और स्थिरता की होती है। पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद उसकी अंतिम तनख्वाह का एक निश्चित प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलता था। यह उन्हें आजीवन आर्थिक स्थिरता देता था। दूसरी ओर, NPS बाजार आधारित है और इसका रिटर्न शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट पर निर्भर करता है। इस कारण कर्मचारियों को यह डर सताता है कि उनकी पेंशन भविष्य में अस्थिर हो सकती है। बढ़ती महंगाई और असुरक्षा के माहौल में कर्मचारी OPS को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं।
आगे की संभावनाएं और सरकार की चुनौतियां
OPS बहाली का मुद्दा आने वाले समय में और भी बड़ा हो सकता है क्योंकि अधिकतर राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और यह मुद्दा सीधे-सीधे लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों को प्रभावित करता है। सरकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय अनुशासन और बजट प्रबंधन की है, क्योंकि OPS से पेंशन खर्च कई गुना बढ़ जाएगा। वहीं, कर्मचारियों और वोट बैंक को संतुष्ट करना भी राजनीतिक दलों के लिए अहम है। यदि OPS को बड़े पैमाने पर बहाल किया जाता है तो भविष्य में इसका असर अन्य सरकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं के बजट पर पड़ सकता है। फिर भी, कर्मचारी संगठन और राजनीतिक दबाव को देखते हुए सरकारें किसी न किसी रूप में OPS पर फैसला लेने के लिए मजबूर हो सकती हैं।
