EPF Pension – रिटायर होने के बाद EPF अकाउंट से मिलने वाली पेंशन हर कर्मचारी के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है। जब कोई व्यक्ति नौकरी से रिटायर होता है, तो उसकी सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि आगे आने वाले वर्षों में उसकी मासिक आय कैसे सुनिश्चित होगी। EPFO (Employees’ Provident Fund Organisation) द्वारा दी जाने वाली पेंशन इस चिंता को काफी हद तक कम कर देती है। EPF पेंशन स्कीम के तहत, कर्मचारी के वेतन और सेवा अवधि के आधार पर पेंशन की राशि तय होती है। जितनी लंबी आपकी सर्विस होगी और जितना अधिक बेसिक सैलरी होगा, उतनी ही ज्यादा पेंशन मिलती है। यह पेंशन ईपीएफ अकाउंट में जमा राशि से अलग होती है और हर महीने रिटायरमेंट के बाद दी जाती है। इस योजना में सरकार की गारंटी भी शामिल होती है, जिससे पेंशनर को सुरक्षित भविष्य का भरोसा मिलता है।

EPF पेंशन कैसे तय होती है
EPF पेंशन की गणना एक निश्चित फार्मूले के तहत की जाती है, जिसमें आपके औसत वेतन और सेवा के वर्षों का ध्यान रखा जाता है। फार्मूला है — (पेंशन योग्य वेतन × सर्विस पीरियड) / 70। पेंशन योग्य वेतन का मतलब है आपकी पिछले 60 महीनों (5 साल) की औसत सैलरी। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति की औसत सैलरी ₹20,000 है और उसने 30 साल सर्विस की है, तो उसकी पेंशन होगी (20,000 × 30) / 70 = ₹8,571 प्रति माह। यानी जितनी ज्यादा सर्विस और सैलरी होगी, उतनी ही बड़ी पेंशन राशि बनेगी। इसके अलावा, अगर किसी ने 20 साल से ज्यादा नौकरी की है, तो उसे अतिरिक्त 2 साल का बोनस सर्विस पीरियड भी मिलता है।
EPFO पेंशन के लिए योग्यता और शर्तें
EPFO पेंशन का लाभ पाने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। सबसे पहले, कर्मचारी को कम से कम 10 साल तक EPF में लगातार योगदान करना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति 58 साल की उम्र में रिटायर होता है और उसने 10 साल या उससे अधिक योगदान किया है, तो उसे मासिक पेंशन का अधिकार मिलता है। वहीं, अगर कोई व्यक्ति 50 से 57 वर्ष की उम्र के बीच रिटायर होता है, तो उसे ‘रिड्यूस्ड पेंशन’ यानी घटाई हुई पेंशन मिलेगी। इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति नौकरी के दौरान ही निधन हो जाए, तो उसकी पत्नी या परिवार को ‘फैमिली पेंशन’ दी जाती है। EPFO पेंशन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आजीवन दी जाती है।
EPF पेंशन निकालने का प्रोसेस
EPF पेंशन निकालने के लिए कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद फॉर्म 10D भरना होता है। यह फॉर्म ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से जमा किया जा सकता है। अगर आप ऑनलाइन आवेदन करना चाहते हैं, तो EPFO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने UAN नंबर और पासवर्ड से लॉगिन करें। इसके बाद ‘Online Services’ टैब में जाकर ‘Claim (Form-10D)’ का चयन करें। सभी जरूरी दस्तावेज जैसे बैंक पासबुक, आधार, पैन कार्ड और सर्विस सर्टिफिकेट अपलोड करें। एक बार वेरिफिकेशन पूरा हो जाने पर पेंशन प्रोसेस शुरू हो जाती है और कुछ दिनों में आपके बैंक खाते में मासिक पेंशन आने लगती है।
EPF पेंशन से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव
रिटायरमेंट से पहले हर कर्मचारी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके EPF खाते में सभी सर्विस वर्षों का योगदान सही तरीके से दर्ज हो। अगर किसी अवधि में PF कटौती नहीं हुई या नियोक्ता ने राशि जमा नहीं की, तो यह पेंशन कैलकुलेशन को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, हर व्यक्ति को 58 साल की उम्र पूरी होने से पहले अपने पेंशन विकल्पों की योजना बना लेनी चाहिए। EPFO की वेबसाइट पर मौजूद पेंशन कैलकुलेटर का उपयोग करके आप यह अनुमान लगा सकते हैं कि रिटायरमेंट के बाद कितनी पेंशन मिलेगी। सही दस्तावेज और समय पर आवेदन से पेंशन मिलने की प्रक्रिया आसान और बिना देरी के पूरी होती है।
